बुधवार, 21 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

 🌹🔱⚜💧मन:शांती💧⚜🔱🌹

🙏🏻 श्री राधे राधे जी 🙏🏻

 प्रिय भगवत्भक्त जी ....

    आपका प्रश्न है कि हम बराबर भजन , पूजन , माला-जाप या सत्संग आदि करते है। ज्यादातर ऐसा कार्य करते है जिसमें कि किसी का भी अहित या नुकसान ना हो , यथा संभव सभी की भलाई की कोशिश करते हुए अपना जीवन यापन करते है फिर भी हमारा मन अशांत या खिन्न क्यों रहता है ?

      प्रिय भक्त जी !.... पूर्णशांति मिलती है हमें आत्म चिंतन से जबकि होता अक्सर यह है कि हम उस मन:शांती को अस्थिर संसार की अलग-अलग भोग-विलास से सम्बंधित चीजो में खोजते है। आइये पहले जाने कि अशांती या खिन्नता उत्पन्न कैसे होती है। जैसे कि ....किसी प्रिय चीज का समय से ना मिलना , पूर्ण कोशिश के बाद भी बार-बार किसी कार्य का बिगडना या समय पर ना हो पाना , हमारी होते हुए भी किसी प्रिय या जरूरी चीज का किसी दूसरे के पास चला जाना अथवा दैनिक जरूरतों का अभाव भी हमारे मन में खिन्नता या अशांती पैदा करता है। .... क्या आप जानते है कि इन असामान्य परिस्थितियों में से ज्यादातर परिस्थितियों का निर्माण हम स्वयं अपने लिए उत्पन्न करते है। कैसे ! ..... जैसे कि ज्यादातर हम उन चीजों पर डिपेंड रहते है जिन्हे प्राय: हम दैनिक यूज करते है। और उनकी हमें धीरे- धीरे आदत बन जाती है और यही आदत हमारे जीवन में धीरे-धीरे जरूरत ( आवश्यकता ) बन जाती है जिसे पूर्ण करना हमारे लिए अनिवार्य हो जाता है। और उसी अनिवार्यता की अपूर्णता या उस वस्तु का अभाव ही हमारे जीवन में खिन्नता यानी अशांती उत्पन्न करता है।
 
    यहां विचारने योग्य है। कि हम जिस पोजिसन या जिन परिस्थियों में अपना जीवन जी रहे है। उस पर गौर करने की .... जरा सोचिये जिस जगह , जिस परिवेस या जिस माहौल में हम है। किसी किसी को तो उतना भी उपलब्ध नही है। कुछ जन कि जिंदगी तो इतनी अभाववास्था में है कि अगर शुबह को भोजन मिला तो शाम का ठिकाना नहीं , तन पर कपडे नहीं हैं। , रहने के लिए एक छप्पर तक नहीं है। अब जरा बताइये क्या हमारी जिंदगी उन से कहीं बेहतर नहीं ? हमें हमारे प्रिय प्रभू ने इतना दिया है। कि अगर हम चाहे तो अपना जीवन कहीं बेहतर अवस्था में शांती पूर्वक बिता सकते है । परंतु फिर भी हम अशांत जीवन जी रहे है। ...जानते है आप कि कमी कहां है ? कमी है। हमारे जीवन में संतोष की, कमी है हमारे जीवन में विश्वास की , ..... अशांती में जीने का कारण यही है कि हम अपनी अस्थिर सुख सुविधाओं में शांती की खोज करते है। तो बताइये जब इस अस्थिर संसार की सुख सुविधाऐ हीं स्थिर नहीं है तो हमारे मन की शांती उन चीजो से हमें कैसे प्राप्त हो सकती है। मन:शांती के लिए हमें अपना चित्त शांत करना होगा और चित्त शांत करने के लिए हमें चिंतन करना होगा ! चिंतन करना होगा हमारी वास्तविक स्थति का कि हमें मन:शांती के लिए किस मार्ग की जरूरत है। और हम किस मार्ग पर जा रहे है। हमारी वास्तविक मंजिल क्या है? .......
        अगर आपका मन निर्गुण निराकार ब्रम्ह को स्वीकार्य करता है और आप अगर सगुण साकार ब्रम्ह की उपासना में रत है। तब भी आपका मन शांत नही रहेगा !

   प्रिय भक्त जी आपको जरूरत है। अपने असली स्वरूप के पहचान की ! आपको जरूरत है। प्रभू की उपासना के सही मार्ग के ज्ञान की आपको जरूरत है। स्व:मन कामनाओं के त्याग की ! तब आप स्वयं के मन को ही नहीं बल्की असली आत्मशांति का स्वयं को अनुभव करवा पाऐगें 💐🙏🏻

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 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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  🌹: कृष्णा : श्री राधा प्रेमी : 🌹          
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🌹एक बार प्रेम से बोलिए ...
🌹प्यारी श्री " राधे राधे "🌹💐💐
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